2026年8月16日|The Wright Brothers News

तीन विश्वविद्यालय छात्र।
एक जापान से।
एक चीन से।
एक दक्षिण कोरिया से।
तीनों की मातृभाषा अलग।
शिक्षा अलग।
संस्कृति अलग।
बहस करने का तरीका अलग।
नेतृत्व और टीमवर्क को देखने का नजरिया भी अलग हो सकता है।
और फिर उनसे कहा जाता है—
“अब आप तीनों एक टीम हैं।”
लगभग एक सप्ताह तक उन्हें साथ रहना है।
साथ खाना है।
साथ सोचना है।
अंग्रेज़ी में बहस करनी है।
एक बिज़नेस प्लान तैयार करना है।
और दूसरी टीमों को हराने की कोशिश करनी है।
यही है International Business Contest — IBC।
19 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक IBC 2026 का आयोजन टोक्यो में किया जाएगा।
इसका आयोजन जापान का छात्र संगठन OVAL JAPAN कर रहा है।
OVAL का अर्थ है—
Our Vision for Asian Leadership
यानी,
“एशिया से भविष्य के वैश्विक नेताओं को तैयार करने की हमारी दृष्टि।”
लेकिन भारत से इस कहानी को देखने पर एक और सवाल पैदा होता है।
यह सिर्फ जापान, चीन और दक्षिण कोरिया की कहानी क्यों हो?
भारत के युवाओं के लिए इसमें क्या है?
जवाब है—
बहुत कुछ।
■ भारत के छात्रों के लिए IBC बिल्कुल अनजान दुनिया नहीं है
भारत में किसी IIT, IIM, BITS, Delhi University या दूसरे बड़े कैंपस में पढ़ने वाले छात्र से बात कीजिए।
वह इन शब्दों से शायद परिचित होगा—
Case Competition
B-Plan Competition
Hackathon
Startup Pitch
Entrepreneurship Cell
Innovation Challenge
Model United Nations
College Fest
Placement Competition
Consulting Club
भारत के प्रतिष्ठित कॉलेजों में केवल कक्षा में अच्छे अंक हासिल करना ही छात्र जीवन का हिस्सा नहीं है।
छात्र स्वयं कार्यक्रम बनाते हैं।
स्टार्टअप शुरू करते हैं।
प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।
कंपनियों के सामने पिच करते हैं।
स्पॉन्सर लाते हैं।
टीमें चलाते हैं।
इसलिए भारतीय छात्र OVAL की भावना को आसानी से समझ सकते हैं।
लेकिन IBC में एक अतिरिक्त कठिनाई है।
आप अपनी पसंद के दोस्तों के साथ टीम नहीं बनाते।
टीम में होते हैं—
एक जापानी छात्र,
एक चीनी छात्र,
और एक दक्षिण कोरियाई छात्र।
तीन देश।
तीन संस्कृतियां।
लेकिन जीत सिर्फ एक टीम की होगी।
■ भारत की IIT-IIM संस्कृति से इसे समझना आसान है
भारत ने दुनिया को बड़ी संख्या में इंजीनियर, टेक्नोलॉजी लीडर, उद्यमी और मैनेजर दिए हैं।
IIT और IIM जैसे संस्थानों की पहचान केवल कठिन प्रवेश परीक्षाओं के कारण नहीं बनी।
उनके आसपास एक मजबूत competitive culture भी विकसित हुआ है।
Case studies.
Business competitions.
Technical festivals.
Entrepreneurship summits.
Consulting challenges.
Startup ecosystems.
इसलिए एक भारतीय पाठक IBC को कुछ इस तरह समझ सकता है—
“कल्पना कीजिए कि एक intense case competition हो, लेकिन आपकी टीम के बाकी दो सदस्य जापान और चीन या कोरिया से हों, और आपको उनके साथ लगभग पूरा सप्ताह रहकर काम करना पड़े।”
यह सिर्फ business knowledge की परीक्षा नहीं रह जाती।
यह इंसान की परीक्षा बन जाती है।
■ JEE की रैंक आपको यह नहीं सिखाती कि अलग संस्कृति के इंसान के साथ कैसे काम करना है
भारत में competition की कोई कमी नहीं है।
JEE.
NEET.
CAT.
UPSC.
Board examinations.
Placements.
Internships.
MBA admissions.
करोड़ों युवाओं के लिए competition जीवन का हिस्सा है।
लेकिन भविष्य की दुनिया एक और skill मांगेगी।
सिर्फ यह नहीं—
“क्या आप दूसरों से बेहतर हैं?”
बल्कि—
“क्या आप ऐसे लोगों के साथ मिलकर परिणाम दे सकते हैं जो आपसे बिल्कुल अलग हैं?”
यही वह जगह है जहां IBC दिलचस्प हो जाता है।

■ कल्पना कीजिए: रात के एक बज रहे हैं
Presentation अगली सुबह है।
टीम थक चुकी है।
जापानी छात्र कहता है—
“Target market बदलना चाहिए।”
चीनी छात्र कहता है—
“यह business model बहुत conservative है।”
कोरियाई छात्र कहता है—
“पूरी presentation दोबारा बनानी होगी।”
अब क्या होगा?
कोई professor जवाब देने नहीं आएगा।
कोई answer key नहीं है।
तीनों को खुद फैसला करना होगा।
और वह भी अंग्रेज़ी में।
यहीं से leadership शुरू होती है।
■ असली परीक्षा अंग्रेज़ी नहीं है
भारत में अंग्रेज़ी का सवाल बहुत संवेदनशील और जटिल है।
कुछ छात्र बचपन से English-medium schools में पढ़ते हैं।
कुछ Hindi-medium या दूसरी भारतीय भाषाओं से आते हैं।
कुछ अंग्रेज़ी बहुत सहजता से बोलते हैं।
कुछ शानदार विचार रखते हैं, लेकिन अंग्रेज़ी में उन्हें तुरंत व्यक्त करना कठिन पाते हैं।
IBC हमें एक महत्वपूर्ण बात याद दिलाता है।
Global leadership का अर्थ केवल fluent English नहीं है।
असल सवाल है—
क्या आपके पास कोई विचार है?
क्या आप उसे समझा सकते हैं?
क्या आप असहमति व्यक्त कर सकते हैं?
क्या आप दूसरे की बात सुन सकते हैं?
क्या आप कह सकते हैं—
“मैं आपसे सहमत नहीं हूं।”
और पांच मिनट बाद उसी व्यक्ति के साथ काम भी जारी रख सकते हैं?
यह grammar से बड़ा कौशल है।
■ भारत जैसे देश को Diversity समझाने की जरूरत नहीं है
भारत में diversity कोई corporate presentation का नया शब्द नहीं है।
यह रोजमर्रा की जिंदगी है।
तमिलनाडु और पंजाब एक जैसे नहीं हैं।
केरल और राजस्थान एक जैसे नहीं हैं।
नागालैंड और गुजरात एक जैसे नहीं हैं।
कश्मीर और कर्नाटक एक जैसे नहीं हैं।
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद—हर शहर की अपनी गति और पहचान है।
हिंदी।
तमिल।
बंगाली।
मराठी।
तेलुगु।
गुजराती।
कन्नड़।
मलयालम।
पंजाबी।
असमिया।
ओड़िया।
और अनेक दूसरी भाषाएं।
भारत अपने भीतर ही अनेक भारत समेटे हुए है।
इसलिए शायद भारतीय पाठक IBC की सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दी समझ सकता है—
अलग होना समस्या नहीं है।
अलग होने के बावजूद साथ काम न कर पाना समस्या है।
■ भारत का संविधान भी विविधता के बीच एकता की एक बड़ी प्रयोगशाला है
दुनिया के सबसे बड़े और सबसे विविध लोकतांत्रिक समाजों में से एक को चलाने के लिए केवल समानता पर्याप्त नहीं हो सकती।
लोग अलग होंगे।
भाषाएं अलग होंगी।
क्षेत्रीय पहचान अलग होगी।
खान-पान अलग होगा।
विचार अलग होंगे।
फिर भी कोई साझा व्यवस्था बनानी होगी।
इसीलिए भारत में “Unity in Diversity” केवल स्कूल की किताब का वाक्य नहीं होना चाहिए।
यह management का सिद्धांत भी है।
और leadership का भी।
IBC इसी विचार को तीन देशों के छोटे से समूह में प्रयोग करता है।
■ जापान, चीन और दक्षिण कोरिया को केवल “East Asia” कह देना भी वैसा ही है जैसे पूरे भारत को एक संस्कृति मान लेना
भारत से देखने पर कभी-कभी जापान, चीन और दक्षिण कोरिया एक ही “East Asia” के हिस्से दिखाई देते हैं।
लेकिन वे बहुत अलग समाज हैं।
उनकी भाषाएं अलग हैं।
इतिहास अलग है।
राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं।
व्यापार संस्कृति अलग है।
शिक्षा अलग है।
संचार के तरीके अलग हैं।
उनके बीच प्रतिस्पर्धा भी है।
ऐतिहासिक संवेदनशीलताएं भी हैं।
इसलिए IBC में तीन देशों के छात्रों को एक टीम बनाना कोई मामूली बात नहीं है।
■ चीन को गंभीरता से लेना इस प्रतियोगिता की बुनियादी शर्त है
IBC के माहौल में चीन से Peking University और Tsinghua University जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भाग लेते रहे हैं।
भारत में IIT का नाम जिस तरह academic excellence और कठिन competition से जुड़ा है, उसी तरह चीन के शीर्ष विश्वविद्यालयों का अपना अत्यंत मजबूत बौद्धिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण है।
जापानी या कोरियाई छात्र के लिए चीनी छात्र केवल “international exchange partner” नहीं है।
वह एक मजबूत teammate भी हो सकता है।
और एक मजबूत competitor भी।
सम्मान का अर्थ सामने वाले को कमजोर समझकर विनम्र होना नहीं है।
सम्मान का अर्थ है—
“मैं जानता हूं कि तुम सक्षम हो। इसलिए मैं तुम्हें गंभीरता से लेता हूं।”
■ यही बात जापान और दक्षिण कोरिया पर भी लागू होती है
जापान से University of Tokyo, Waseda University, Keio University और Sophia University जैसे संस्थानों के छात्र OVAL के वातावरण से जुड़े हैं।
दक्षिण कोरिया से Seoul National University जैसे प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्र भाग लेते रहे हैं।
इसका अर्थ है कि तीनों तरफ ambitious young talent मौजूद है।
IBC friendship camp नहीं है।
यह friendship और competition को एक ही कमरे में रख देता है।
■ और यह भारतीय सोच के बहुत करीब है
भारत में हम एक दिलचस्प विरोधाभास के साथ बड़े होते हैं।
हम अपने दोस्तों से प्यार करते हैं।
और उन्हीं दोस्तों से परीक्षा में compete भी करते हैं।
Cricket में opposition से भिड़ते हैं।
Match खत्म होने के बाद हाथ मिलाते हैं।
College fest में दूसरे campus को हराना चाहते हैं।
फिर उसी campus के छात्रों के साथ networking करते हैं।
Competition और relationship हमेशा दुश्मन नहीं होते।
IBC भी यही दिखाता है।
आप किसी का सम्मान करते हुए उससे पूरी ताकत से मुकाबला कर सकते हैं।
■ Cricket इसे शायद सबसे आसान तरीके से समझाता है
भारतीय पाठक के लिए एक sporting analogy उपयोगी है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया मैदान पर बेहद आक्रामक मुकाबला कर सकते हैं।
भारत और इंग्लैंड जीतने के लिए पूरी ताकत लगा सकते हैं।
IPL में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हैं, फिर उसी franchise में teammate बन जाते हैं।
आज opponent.
कल teammate.
यही global business में भी होता है।
आज कोई चीनी कंपनी competitor है।
कल वही technology partner हो सकती है।
आज जापानी company दूसरे bidder के रूप में सामने है।
कल joint venture partner बन सकती है।
युवाओं को यह मानसिक flexibility जल्दी सीखनी होगी।
■ “Vasudhaiva Kutumbakam” को अगर business team में उतारें तो क्या होगा?
भारत की प्राचीन परंपरा में एक प्रसिद्ध विचार है—
“वसुधैव कुटुम्बकम्”
अर्थात—
“विश्व एक परिवार है।”
लेकिन परिवार का अर्थ यह नहीं कि परिवार में कभी मतभेद नहीं होते।
असल परिवार वह है जिसमें मतभेद के बाद भी रिश्ता बचा रहता है।
यही बात अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी लागू हो सकती है।
“दुनिया एक परिवार है” कहना सुंदर है।
लेकिन कठिन सवाल है—
क्या हम उस परिवार के उस सदस्य के साथ काम कर सकते हैं जो हमसे सहमत नहीं है?
IBC इसी प्रश्न को practical बना देता है।
■ विविधता तब उपयोगी होती है जब वह निर्णय बदलती है
मान लीजिए टीम में जापानी, चीनी और कोरियाई छात्र हैं।
लेकिन निर्णय हमेशा एक ही व्यक्ति लेता है।
तो केवल तीन पासपोर्ट मौजूद हैं।
असल diversity नहीं।
असली diversity तब है जब—
चीनी छात्र वह market opportunity देखे जो बाकी दो नहीं देख पाए।
जापानी छात्र वह operational risk पकड़ ले जो दूसरों से छूट गया।
कोरियाई छात्र ऐसा consumer insight दे जो पूरी strategy बदल दे।
और अंत में business plan तीनों के कारण बेहतर हो।
तभी diversity तस्वीर से निकलकर value बनती है।
■ भारत की कंपनियों के लिए यह बहुत बड़ा विषय है
भारतीय कंपनियां तेजी से वैश्विक हो रही हैं।
IT services.
Pharmaceuticals.
Automobiles.
Fintech.
SaaS.
Manufacturing.
Renewable energy.
Space technology.
Startups.
Global Capability Centres.
भारत के professionals आज दुनिया भर की teams के साथ काम करते हैं।
अमेरिका।
यूरोप।
जापान।
सिंगापुर।
मध्य पूर्व।
चीन।
दक्षिण कोरिया।
इसलिए भारत के अगले generation के leaders को केवल “Indian market” समझना पर्याप्त नहीं होगा।
उन्हें cultural intelligence भी चाहिए।
■ जापान और भारत के बीच भी यह कौशल बहुत महत्वपूर्ण है
भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंध लगातार गहरे हुए हैं।
Infrastructure.
Manufacturing.
Automobiles.
Technology.
Investment.
Metro projects.
Industrial cooperation.
लेकिन भारतीय और जापानी workplace culture में अंतर हो सकता है।
भारतीय professional कभी अधिक spontaneous या direct दिखाई दे सकता है।
जापानी team consensus और preparation पर अधिक समय लगा सकती है।
बेशक हर व्यक्ति अलग है।
लेकिन cultural tendencies को समझे बिना गलतफहमी पैदा हो सकती है।
इसलिए OVAL की कहानी भारत-जापान संबंधों के लिए भी उपयोगी lesson देती है।
■ चीन और भारत के बीच भी युवा पीढ़ी को एक-दूसरे को केवल headlines से नहीं जानना चाहिए
भारत और चीन दुनिया की दो विशाल सभ्यताएं हैं।
दोनों की जनसंख्या बहुत बड़ी है।
दोनों के पास गहरी ऐतिहासिक परंपराएं हैं।
दोनों तेजी से आधुनिक हुए हैं।
दोनों technology, manufacturing, education और entrepreneurship में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
और दोनों के बीच जटिल मुद्दे भी हैं।
इसीलिए people-to-people understanding महत्वपूर्ण है।
एक देश को केवल geopolitical headline के रूप में देखना आसान है।
एक इंसान के साथ काम करने के बाद वही देश अधिक जटिल और अधिक मानवीय दिखाई देता है।
■ “China”, “Japan”, “Korea”, “India” — ये शब्द बहुत बड़े हैं
कोई एक छात्र पूरे चीन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
कोई एक छात्र पूरे जापान का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
कोई एक भारतीय भी 1.4 अरब से अधिक लोगों की हर सोच का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
यही व्यक्तिगत मुलाकात की खूबसूरती है।
“Chinese student” धीरे-धीरे बन जाता है—
वह दोस्त जो Excel में कमाल करता है।
“Japanese student” बन जाता है—
वह teammate जो presentation की हर detail तीन बार check करता है।
“Korean student” बन जाता है—
वह व्यक्ति जिसने रात दो बजे पूरी pitch बचा ली।
देश का नाम पीछे चला जाता है।
इंसान सामने आ जाता है।
■ Culture Study क्यों जरूरी है?
IBC में जापान, चीन और दक्षिण कोरिया की संस्कृति समझने के लिए Culture Study का समय भी रखा जाता है।
क्यों?
क्योंकि international team में बहुत से conflicts वास्तव में personality conflicts नहीं होते।
वे interpretation conflicts होते हैं।
कोई चुप है।
क्या वह कमजोर है?
जरूरी नहीं।
कोई बहुत direct है।
क्या वह rude है?
जरूरी नहीं।
कोई तुरंत decision नहीं ले रहा।
क्या वह indecisive है?
जरूरी नहीं।
शायद वह consensus बना रहा है।
Global leader बनने का एक महत्वपूर्ण नियम है—
अपने cultural default को universal truth मत समझिए।
■ भारत स्वयं इस skill का विशाल training ground हो सकता है
एक उत्तर भारतीय manager दक्षिण भारत में काम करता है।
एक तमिल engineer गुरुग्राम की team में जाता है।
एक बंगाली professional बेंगलुरु startup join करता है।
एक महाराष्ट्र का founder Hyderabad में team बनाता है।
यह international नहीं है।
लेकिन cultural adaptation फिर भी चाहिए।
भारत के भीतर diversity इतनी विशाल है कि भारतीय युवाओं के पास cross-cultural leadership सीखने की प्राकृतिक क्षमता है।
अगर उसी क्षमता को international level पर ले जाया जाए,
तो यह भारत की बड़ी ताकत बन सकती है।
■ OVAL JAPAN को चलाने वाले भी छात्र ही हैं
यह कहानी का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
OVAL JAPAN कोई बड़ी consulting company नहीं चला रही।
यह students द्वारा संचालित organization है।
University of Tokyo.
Waseda University.
Keio University.
Sophia University.
और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र इसके संचालन में शामिल हैं।
वे स्वयं—
कार्यक्रम बनाते हैं।
प्रतिभागियों से संपर्क करते हैं।
China और Korea की teams से coordination करते हैं।
Sponsors और supporters से बात करते हैं।
Logistics संभालते हैं।
Problems solve करते हैं।
और फिर लगभग डेढ़ वर्ष के सीमित कार्यकाल के बाद अगली generation को जिम्मेदारी सौंप देते हैं।
यह अपने आप में leadership training है।
■ भारतीय E-Cell और student societies इसे तुरंत समझेंगे
भारत में Entrepreneurship Cells, consulting clubs, debating societies, technical societies और college fest committees चलाने वाले छात्र जानते हैं कि “student organization” का अर्थ केवल meeting करना नहीं है।
Budget चाहिए।
Sponsors चाहिए।
Venue चाहिए।
Marketing चाहिए।
Volunteers चाहिए।
Deadlines चाहिए।
और जब event के दिन कुछ गलत होता है—
तो professor हमेशा बचाने नहीं आता।
आपको खुद समाधान निकालना पड़ता है।
इसीलिए OVAL का बीस वर्षों से अधिक समय तक चलना अपने आप में उल्लेखनीय है।
■ महामारी ने एक पुरानी बात फिर साबित की—स्क्रीन इंसान की पूरी जगह नहीं ले सकती
COVID के दौरान दुनिया ने remote collaboration सीख लिया।
Zoom.
Teams.
Google Meet.
Online classrooms.
Remote work.
लेकिन एक चीज बदल जाती है।
Online argument के बाद आप laptop बंद कर सकते हैं।
एक सप्ताह साथ रहने पर नहीं।
जिस व्यक्ति से रात में झगड़ा हुआ,
सुबह वही breakfast table पर बैठा है।
फिर उसी के साथ presentation पूरी करनी है।
यहीं relationship management सीखना पड़ता है।
■ नेतृत्व का असली टेस्ट तब है जब आपके पास कोई official title नहीं है
तीन छात्रों की टीम में CEO कौन है?
कोई नहीं।
फिर leader कौन बनेगा?
जो सबसे ज्यादा बोलता है?
जरूरी नहीं।
शायद वह व्यक्ति जो conflict के समय दोनों पक्षों को सुनता है।
शायद वह जो कहता है—
“रुको। पहले समस्या define करते हैं।”
शायद वह जो अपनी पसंदीदा idea छोड़ देता है क्योंकि दूसरी idea बेहतर है।
Leadership हमेशा designation से शुरू नहीं होती।
कई बार वह behavior से शुरू होती है।
■ भारत के startup ecosystem के लिए यह lesson खास है
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े startup ecosystems में से एक है।
Bengaluru.
Delhi NCR.
Mumbai.
Hyderabad.
Chennai.
Pune.
और अनेक दूसरे शहर।
Founders को आज सिर्फ भारतीय teams नहीं बनानी।
उन्हें global investors से बात करनी है।
विदेशी customers समझने हैं।
दूसरे देशों में offices खोलने हैं।
Multicultural teams manage करनी हैं।
इसलिए future founder के लिए सबसे महत्वपूर्ण skill शायद coding या finance के साथ यह भी है—
“क्या मैं ऐसे इंसान के साथ company बना सकता हूं जो मेरे जैसा नहीं सोचता?”
■ IBC के अलावा TIBC और SEP भी हैं
OVAL JAPAN की गतिविधियां केवल IBC तक सीमित नहीं हैं।
TIBC — Tokyo International Business Contest
जापान में छात्रों को business planning और presentation की चुनौती देता है।
वहीं,
SEP — Staff Exchange Program
जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के OVAL staff को एक साथ लाता है।
अर्थात organizers स्वयं भी international collaboration से गुजरते हैं।
वे केवल दूसरों को diversity नहीं सिखाते।
उन्हें खुद diversity में काम करना पड़ता है।
■ बीस साल बाद OVAL के सामने एक नया सवाल है
एक intensive programme की ताकत उसकी intimacy होती है।
लेकिन वही उसकी सीमा भी है।
करीब सौ लोगों का अनुभव बहुत गहरा हो सकता है।
लेकिन लाखों छात्र उसमें सीधे शामिल नहीं हो सकते।
तो सवाल है—
इस अनुभव को ज्यादा युवाओं तक कैसे पहुंचाया जाए?
Social media?
Videos?
Articles?
Larger competitions?
Regional programmes?
शायद भविष्य में OVAL को इसका जवाब खोजना होगा।
■ लेकिन क्या 100 युवा वास्तव में कम हैं?
आज वे केवल university students हैं।
दस या बीस वर्ष बाद—
कोई startup founder हो सकता है।
कोई multinational company का executive।
कोई researcher।
कोई investor।
कोई government official।
कोई professor।
और किसी दिन उसे Japan, China या Korea से जुड़ा बड़ा फैसला लेना होगा।
तब शायद उसे याद आए—
“जब मैं बीस साल का था, मैंने उस देश के एक छात्र के साथ एक सप्ताह काम किया था।”
एक सप्ताह छोटा है।
लेकिन यादें कभी-कभी नीति और व्यवसाय से ज्यादा लंबे समय तक जीवित रहती हैं।
■ भारत के लिए शायद सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है
भारत दुनिया में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
भारत के युवा केवल भारत के लिए काम नहीं करेंगे।
वे दुनिया के साथ काम करेंगे।
इसलिए हमें केवल brilliant students नहीं चाहिए।
हमें ऐसे युवा चाहिए जो—
अपनी पहचान पर गर्व कर सकें,
दूसरे की पहचान का सम्मान कर सकें,
competition से न डरें,
disagreement से न भागें,
और फिर भी team बना सकें।
यही modern global leadership है।
■ 19 अगस्त को टोक्यो में एक छोटा-सा East Asia बनेगा
IBC 2026 जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के सारे मतभेद नहीं मिटाएगा।
न उसे ऐसा करना चाहिए।
कुछ दर्जन युवा बस—
मिलेंगे।
खाएंगे।
काम करेंगे।
बहस करेंगे।
थकेंगे।
हारेंगे।
जीतेंगे।
फिर घर लौट जाएंगे।
लेकिन शायद कुछ बदल जाएगा।
जब कोई जापानी छात्र बाद में “China” सुनेगा,
तो उसे सिर्फ headline याद नहीं आएगी।
उसे एक teammate का चेहरा याद आएगा।
जब कोई चीनी छात्र “Korea” सुनेगा,
तो उसे वह व्यक्ति याद आ सकता है जिसने उसकी idea को चुनौती दी थी।
और जब कोई कोरियाई छात्र “Japan” सुनेगा,
तो उसे वह साथी याद आ सकता है जिसके साथ उसने रातभर presentation बनाई थी।
■ शायद “वसुधैव कुटुम्बकम्” का आधुनिक अर्थ यही है
विश्व एक परिवार है।
लेकिन परिवार इसलिए परिवार नहीं है क्योंकि सभी एक जैसे सोचते हैं।
परिवार इसलिए टिकता है क्योंकि मतभेद के बाद भी बातचीत समाप्त नहीं होती।
IBC की सबसे बड़ी सीख शायद business plan नहीं है।
शायद यह है—
“हम अलग हैं।”
“हम असहमत हैं।”
“लेकिन काम अभी खत्म नहीं हुआ।”
“बैठो।”
“फिर से बात करते हैं।”
और शायद,
भविष्य का एशिया ऐसी ही छोटी मेजों से बनना शुरू होगा।
■ संपादकीय टिप्पणी
■ OVAL JAPAN क्या है?
OVAL JAPAN जापान का एक student-led organization है जो जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के छात्रों को international business competitions और exchange programmes के माध्यम से जोड़ता है।
OVAL का अर्थ है:
Our Vision for Asian Leadership
■ IBC क्या है?
IBC का पूरा नाम International Business Contest है।
जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के छात्र multinational teams बनाकर अंग्रेज़ी में business plans विकसित करते हैं और दूसरी teams के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।
■ IBC 2026 कब होगा?
19 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक।
स्थान: टोक्यो, जापान।
■ किन विश्वविद्यालयों के छात्र इसमें शामिल रहे हैं?
इस programme से जुड़े छात्रों में प्रमुख East Asian universities के विद्यार्थी शामिल रहे हैं, जैसे:
Peking University
Tsinghua University
Seoul National University
University of Tokyo
Waseda University
Keio University
Sophia University
आदि।
■ भारतीय पाठक इसे किससे compare कर सकते हैं?
इसका कोई बिल्कुल समान भारतीय equivalent नहीं है।
लेकिन इसके कुछ तत्व भारत के:
IIT और IIM case competitions,
Entrepreneurship Cells,
B-Plan competitions,
startup challenges,
international student programmes,
consulting clubs,
और student-led college organisations
से मिलते-जुलते हैं।
IBC की विशेषता यह है कि Japan-China-South Korea cross-cultural collaboration इसके मूल design में है।
■ TIBC क्या है?
TIBC का अर्थ है:
Tokyo International Business Contest
यह OVAL JAPAN से जुड़ा एक business competition programme है।
■ SEP क्या है?
SEP का अर्थ है:
Staff Exchange Program
इसमें Japan, China और South Korea के OVAL staff members एक साथ आते हैं और programme planning, international exchange तथा organisational collaboration पर काम करते हैं।
■ भारतीय युवाओं के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि भविष्य का भारत अधिक international होगा।
भारतीय professionals और entrepreneurs को Japan, China, South Korea, Southeast Asia, Middle East, Europe और America के लोगों के साथ काम करना होगा।
ऐसी दुनिया में केवल technical knowledge पर्याप्त नहीं है।
Cross-cultural leadership भी आवश्यक है।


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