संग्रहालय के एक शांत हिस्से में पत्थर की एक टूटी हुई आकृति खड़ी थी। उसका चेहरा नहीं था, फिर भी उसमें ऐसा मौन था जैसे वह बीते हुए समय की गवाह हो।
लोग उसके पास से गुजरते रहे। किसी ने कुछ पल रुककर देखा, कोई आगे बढ़ गया। कैमरे में उनके चेहरे और कदम धुंधले दिखाई दिए—लेकिन एक पुरानी घड़ी बिल्कुल स्थिर थी।
उसके पास लिखा था:
9 अगस्त 1945
नागासाकी के उस दिन को कई दशक बीत चुके हैं, फिर भी उसकी पीड़ा इतिहास से मिट नहीं सकी।
समय आगे बढ़ता है, शहर बदलते हैं और पीढ़ियाँ गुजर जाती हैं। फिर भी कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें सुरक्षित रखना पड़ता है। वे हमें बताती हैं कि शांति आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है।
कुछ घड़ियाँ रुक जाती हैं, ताकि इंसान भूल न जाए।




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